भूत की F.I.R. | Bhoot Ki FIR Hindi Story | Horror Hindi Script part-1

भूत की F.I.R. | Bhoot Ki FIR Hindi Story | Horror Story Hindi Script|Written By : Rahul Singh

(Part :1 / भाग -1)
Hindi Story Bhoot Ki FIR Synopsis : 
यह कहानी  किशनपाल नामक के भूत की है जो कि अपनी द्वारा की गई बेवफाई का बदला कानूनी तरीके से लेता है । इस कहानी के सभी पात्र और उनमें दर्शायी जाने वाली घटनाओं को हम फ़िल्म के सीन में रूपांतरित करके आपके लिए लाए है । कृपया आपके सुझाव हमें कॉमेंट में अवश्य दें ।
Hindi Story


सीन 1 
पात्र : इंस्पेक्टर, 2 हवलदार, मंगेश की आत्मा
लोकेशन : पुलिस स्टेशन
प्रॉपर्टी : दारू की बोतल, चखना, ग्लास, पुलिस स्टेशन की जनरल प्रोपेर्टी
टाइम : रात 1 बजे


इंस्पेक्टर अपनी चेयर पर से टेबल पर टांग पर टांग चढ़ाए बैठा है,.. उसके हाथ मे शराब की ग्लास है,.. एक घूंट के साथ उसके फेस के CU से frame full wide होता है । उसके अगल बगल 2 हवलदार पप्पू और हप्पू रहते है । 

हप्पू
साहब जी ! आज तो बहुत खुश लग रहे हो ।

पप्पू
अरे आज हमारे साहब ने बहुत पुराना कैश निपटाया है ।

इंस्पेक्टर पी रहा है उनकी बातों में शरीक न होकर वह नशे में चेहरे पर मुस्कान लिए बैठा है ।

हप्पू
अच्छा ऐसा कौन सा केश निपटाया ?

पप्पू
अरे हमारे साहब की बीवी को शक था कि इनका किसी बाहर वाली से चक्कर है , इसी चक्कर मे साहब को मैडम जी घर मे घुसने नही दे रही थी बिचारे चौकी में ही ओवर टाइम करते थे ।

हप्पू
फिर क्या हुआ ?

पप्पू
फिर क्या होगा , साहब ने मैडम जी को तलाक ही दे दिया और केश ही रफा दफा कर दिया । 

हप्पू अपने दिमाग पर फिंगर ठोक कर इंस्पेक्टर के माइंड की तारीफ जताता है ।

इंस्पेक्टर
अबे चुप हो जाओ तुम दोनों , आज की शाम को खराब मत करो । तुम दोनों भी एन्जॉय करो ।

दोनो हवलदार भी एक एक पेग हाथ मे लेते है और घूंट लगाते है । तभी पुलिस स्टेशन का मैन डोर खटाक करके खुलता है । बाहर से रौशनी आ रही है । तीनों के मुख पर लाइट पड़ता है । 
लाइट के किरनों में धुँआ सा है । और उसी में एक व्यक्ति खड़ा है जिसकी केवल काली परछाई ही दिख रही है । 

इंस्पेक्टर
कौन है बे ? इतनी रात को क्यों आया है ?


वह शक्श वहीं खड़ा रहता है । कुछ बोलता नही है । हप्पू पप्पू भी नशे की हालत में आंखे फाड़कर उसको देखने लगते है ।

हप्पू

कौन है बे... जानता नहीं इतनी रात को हमारे आराम का टाइम होता है । (नशे में )


वह शक्श धीरे धीरे अपने कदम अंदर की ओर बढाता है । उसके कदमो के चप्पल को आवाज आती है- चप चप चप.। उसका चेहरा अंधेरे के कारण दिखाई नही दे रहा है । तीनों उसको चलते आ रहे देख अपने जगह पर चौकन्ना खड़े हो जाते है । वह आदमी है जोकि 35 वर्ष का है । साधारण सा दिखने वाला व्यक्ति किशनपाल है जो फॉर्मल कपड़े में है ।


इंस्पेक्टर

कौन है भाई तू ?.. इतना सस्पेंस बना कर क्यों आ रहा है ?

किशनपाल थोड़ा और आगे आता है । और अब उसका चेहरा अंदर की लाइट की वजह से फ़ोकस में आता है ।

किशनपाल

मुझे F. I.R. लिखवानी है ।


इंस्पेक्टर

अभी थाना बंद है कल सुबह आ जाना ।


किशनपाल

मुझे अभी लिखवानी है ।

किशनपाल अपने भारी आवाज में इंस्पेक्टर से FIR लिखने के लिए बोल रहा है । दोनो हवलदार नशे में झूम रहे है । इंस्पेक्टर का किशनपाल की ज़िद देख कर थोड़ा माथा ठनका । वह हां में सिर हिला कर टेबल पर पैर लटका कर बैठ जाता है । फिर एक डायरी उठा कर उसमें उसका रिपोर्ट लिखने लग जाता है । 


इंस्पेक्टर

हाँ तो किस बात की FIR लिखवानी है ?


किशनपाल

मर्डर की FIR लिखवानी है ।


इंस्पेक्टर

मर्डर किसका हुआ है ?


किशनपाल

मेरा...!


ये बात सुनकर हप्पू के मुँह से शराब का फुहारा निकल जाता है ।वह डंडा हिलाते हुए उस आदमी के करीब आता है । पप्पू अपनी आंखें बड़ी कर लेता है । और इंस्पेक्टर अपनी डायरी बंद करके साइड रखता है ।


हप्पू

अबे ! पी हम लोग रहे है चढ़ तुझे गयी है । कायको हमारे साहब का टाइम खोटी कर रहेला है ?


इंस्पेक्टर

(हंसते हुए) मतलब तू तेरी मौत का रिपोर्ट लिखवाने आया है ?


किशनपाल

हाँ...


इंस्पेक्टर

मतलब की तू भूत है ?


किशनपाल

हाँ... 


इंस्पेक्टर

मतलब हम लोग पागल है ? 


दोनो हवलदार जोर जोर से हंसने लगते है । इंस्पेक्टर अजय उनको शट अप बोलता है ।

देख बे भूतनी के , ये मजाक का वक्त नही है । साला अच्छा भला चढ़ा हुआ माल उतार दिया । जा नही लिखता तेरा FIR ।


किशनपाल

साहब मेरा यकीन कीजिए । मैं मर चुका हूँ अभी थोड़ी देर पहले ही मेरा मर्डर हुआ है ।


हप्पू पप्पू दोनो की उतर जाती है दोनों डंडा लेके उसके आजु बाजू चक्कर लगाने लगते है । फिर रुककर - दोनो उसके अगल बगल खड़े हो जाते है इंस्पेक्टर की तरफ मुह करके ।

हप्पू

देख बे आज हमारे साहब बहुत अच्छे मूड में है । इसीलिए तू ज़िंदा खड़ा है अगर एक बार हमारे साहब का मूड घूम गया ना तू अभी के अभी यमराज को प्यारा हो जाएगा ।


किशनपाल

मैं ज़िंदा नही हूँ और ना ही यमराज को प्यारा हो पा रहा हूँ , मुझे इंसाफ दिलाकर आप लोग ही मुझे मुक्ति दिला सकते है ।


पप्पू

साहब मुझे तो ये कोई पागल लगता है । बोलो तो इसको लॉकअप में डाल कर थर्ड डिग्री दे दूं ?


इंस्पेक्टर

नही कोई जरूरत नही । हाँ तो तेरा नाम क्या बताया भाई ?


किशनपाल

(नाम) किशनपाल साब जी ।


इंस्पेक्टर

हाँ तो तुम मर चुके हो और तुम भूत बन चुके हो यही कहना चाहते हो न ?

हम कैसे मान ले कि तुम सच कह रहे हो ?


किशनपाल

साहब जी आपको पता है कि आत्मा की परछाई नही दिखाई देती है ।


इंस्पेक्टर 

हाँ पता है .....तो


किशनपाल

तो.. आप देखिए साहब जी मेरे आजु बाजू खड़े दोनो हवलदार की परछाई दिख रही है पर मेरी नही दिख रही है ।


हम देखते है कि सिर्फ दो हवलदारों की परछाई दिख रही है जबकि बीच मे खड़े किशनपाल की परछाई नही दिख रही है  । दोनों हवलदार अपने पैरों के तरफ अपनी परछायी देखते है फिर किशनपाल की देखते है लेकिन उनको किशनपाल की परछाई नही दिखाई देती है । इंस्पेक्टर की आंखे फटी की फटी रह जाती हैं । अगल बगल दोनो इंस्पेक्टर कांपने लगते है । और डर के मारे उनकी आंखें घूमने लगती है और बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़ते है । सीन ब्लैक होता है । 


कट टू


अगले पल देखते है कि वह भूत किशनपाल टेबल पर अपने पैर लटका कर बैठा है । उसके सामने तीनो पुलिस वाले खड़े होकर थर थर कांप रहे है । इंस्पेक्टर ने अपने हाथ मे डायरी लिया हुआ है जो किशनपाल का FIR कांपते हाथों से लिखने की कोशिश करता है ।

इंस्पेक्टर

(डरे हुए लहजे में ) भ.. भ..भूत जी ! मेरा मतलब आपका खून किसने किया ? क्या आपको किसी पर शक है ?


किशनपाल

(अपने पैर जोर से हिलाते हुए) मेरी बीवी अनिता ने । एक नंबर की बेवफा औरत है वो । नही छोडूंगा उसको । 


इंस्पेक्टर

लेकिन आप तो भूत है आप चाहे तो उसको खुद सजा दे सकते है और आप पर कोई केश भी नही बनेगा ।


किशनपाल

मैं नही चाहता कि मेरे क़ातिल गुमनामी की मौत मरे इसीलिए उन्हें क़ानूनन सजा दिलवाना चाहता हूँ ।


इंस्पेक्टर

आप ज़रा डिटेल में बताएंगे वहाँ क्या हुआ आपके साथ । 

कैमरा किशनपाल पर कलॉज जाता है । किशनपाल सोचते हुए ।

कट टू



फ्लैश बैक में

सीन 2

लोकेशन : दिलीप सेठ की ऑफिस

पात्र : दिलीप सेठ , किशनपाल

प्रोपेर्टी : ऑफिस की सामान्य वस्तुयें

टाइम : दिन


(दिलीप सेठ हट्टा कट्टा मर्द पेशे से बिल्डर है । किशनपाल उसका बहुत ही पुराना वफादार PA है ।)

किशनपाल अपने जेब से कुछ रुपये निकाल कर दिलीप सेठ को देता है । 

किशनपाल

ये लीजिए सेठ जी सीमेंट की बोरियां आ चुकी है , बिल पेमेंट करने के बाद कुछ रुपये बच गए ।


दिलीप सेठ

किशनपाल तुम जानते आज के समय मैं सबसे ज्यादा अगर किसी आदमी पर विश्वास कर सकता हूँ तो वह हो तुम ।


किशनपाल

अरे सेठ जी ! ये तो आपका बड़प्पन है । 


दिलीप सेठ 

खैर छोड़ो ! ये बताओ कि तुम्हारी शादी सुदा लाइफ ठीक से तो चल रही है ना ? कहीं कोई दिक्कत या परेशानी तो नही ।


किशनपाल

जी सेठ जी आपकी दया से सब कुछ बढ़िया चल रहा है । बीवी को किसी बात की कोई कमी नही होने देते है।


दिलीप सेठ

(निराश भाव मे) चलो तुम्हारी तो अच्छी कट रही है और एक हम ससुर हमारी बीवी को सम्हाल नही पा रहे है जब देखो मुह फुला कर मायके चली जाती है । होटल से खाना मंगा मंगा कर खाना पड़ता है । ससुरी पूरी सेहत उतर गयी है मेरी ।


किशनपाल

सेठ जी १ छोटा मुह बड़ी बात....अगर आज आप मेरे घर रात का भोजन करने पधारे तो बड़ी कृपा होगी । हमारी अनु बहुत ही स्वादिष्ट खाना बनाती है । इसी बहाने आप होटल का खाना खाने से भी परहेज़ कर सकेंगे ।


दिलीप सेठ

अरे किशनपाल कैसी बात कर रहे हों , हम जरूर आएंगे ।

(कट टू)


सीन 3

लोकेशन : किशनपाल का घर 

पात्र : किशनपाल, अनिता, दिलीप सेठ

प्रोपेर्टी : डाइनिंग टेबल, पनीर मसाला की सब्जी, सलाद, चपाती, जीरा राइस, प्लेट, स्पून etc

टाइम : नाईट 


ब्लैक स्क्रीन में डोर बेल बजता है । दरवाजा खुलता है। दिलीप सेठ गेट पर खड़ा किशनपाल को नमस्ते करता है । 


किशनपाल

अरे नमस्ते सेठ जी ! आपका बहुत बहुत स्वागत है । आइए..आपके चरण हमारे गरीब खाने में लाइये । आइए ।


किशनपाल पाल सोफे पर सेठ को बैठाता है । वह बगल के सोफे पर बैठता है । 


किशनपाल

अरे सुनती हो ! सेठ जी आये है पानी वानी लाओ ।


अनिता(V.O. ) 

(किचन से) जी आयी...


अनिता ट्रे में पानी की ग्लास लिए आती है । वह काफी गोरी आकर्षक लग रही है । उसने कमर से साड़ी खोंसी हुई है । लचकते कमर से बलखाते हुए है । उसको आते देख दिलीप सेठ अट्रैक्ट हो जाता है । 


किशनपाल

सेठ जी ! हमारे रायपुर वाले प्लांट में जो फैक्ट्री लगी है उसके डील के लिए बाहर से एक व्यापारी आ रहे है ।


मोंटाज सीन चल रहा है- सेठ अनिता को देखे जा रहा है । भाभी आ रही है । वह दिलीप सेठ को झुक कर ग्लास पकड़ाती है । जिससे उसके स्तन के गल्ले दिख रहे है । दिलीप सेठ पानी का गिलास उठाता है । और पीते हुए बहुत हवस की नजर से अनिता को देखता है । वह भी दिलीप सेठ को बड़े गौर से देख रही है । 


कट टू

सेठ और किशनपाल डाइनिंग टेबल पर बैठे हुए है । लगभग दोनो का पेट भर चुका है । किशनपाल पर सेठ को मुखवास पास करता है । सेठ मुखवास खाकर ।


दिलीप सेठ

भई वाह ! क्या खाना बनाती है भाभी जी आप । किशनपाल ने जितनी तारीफ की आप तो उससे कही ज्यादा खूबसूरत है । हर काम मे । (ख्वाहिश भरी निगाह से देखते हुए )

किशनपाल तुमने हमारे काम मे दिन रात मेहनत की है । और हमारी DK group of Company को बुलंदी पर  ला खड़ा किया है । इसीलिए हम आते वक्त तुम्हारे लिए एक तोहफा लेते आये है ।


किशनपाल

तोहफा! .... कैसा तोहफा सेठ जी ?


दिलीप सेठ

(अपने जेब से कार की चाभी निकाल कर देते हुए) तुम्हारे लिए । 


किशनपाल

सच मे सेठ जी !..कहीं ये सपना तो नही...शुक्रिया सेठ जी । 


दिलीप सेठ

अरे किशनपाल जाकर देखो तो सही तुम्हारी ब्रांड नई कार कैसी है ।


किशनपाल

(खुशी के मारे) हाँ... हाँ... सेठ जी अभी देखता हूँ ।


किशनपाल खुशी के मारे फुले नही समा रहा है और भागते हुए बाहर जाता है ।


अनिता सेठ को देख कर के कातिल स्माइल देती है । सेठ उसके कमर पर हाथ रख कर अपनी तरफ खींचता है । और उसको मुस्कुराते हुए रोमांटिक नज़रो से देखते हुए ।


दिलीप सेठ

और कैसा लगा मेरा तोहफा ?


अनिता

बिल्कुल तुम्हारी तरह  मस्त....!

कट टू

(भाग -1 समाप्त)


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