Best thriller web Series hindi story |Ghar Jamayi|

Best hot and thriller web Series 

घर जमाई 

(Web Series Part-1)

इस कहानी में देखेंगे कि किस तरह माँ बेटी अपने ऐशोआराम के लिए आपराधिक घटनाओं को अंजाम देते हैं ।


In this story, we will see how mother and daughter commit criminal incidents for their selfishness.

 मध्यप्रदेश के झलारिया गांव के जमींदार रामदेव प्रजापति अपनी पत्नी जमुना के निधन के ५ साल बाद फिर से विवाह कर एक औरत को अपनी बीवी बना कर अपने गाओं लेकर आता है , उस औरत की उसके पहले पति से एक १० साल की छोटी बच्ची थी।
रामदेव उस लड़की से सगे बाप की तरह प्यार नहीं करता था बचपन में उस लड़की की शरारतों से परेशांन होकर कभी कभी उसे मरता था , उसको हमेशा सौतेला बाप होने का अहसास कराता था उसके खिलौने तोड़ देता था। वो जब खाना खाने बैठता था तो उस लड़की को देख कर कुछ भी नहीं खाता था।

उसकी पत्नी को भी उस लड़की की वजह से ignore करने लगा था । सबको को घर में तानाशाह की तरह ट्रीट करता था । उसकी वाइफ को और बच्ची को उस हवेली से बहार जाने नहीं देता था वो दोनों उसकी मर्जी के बगैर कुछ नहीं करती थी. ऐसे १० साल बित जाते है।

 रामदेव का व्यापार काफी बड़ा हो चूका था , उसका मैनेजर मुनीम सुखीराम उसके व्यापार को काफी मेहनत और लगन से संभालता था। वही रामदेव की गैरहाजरी में उसकी पत्नी प्रमिला को उसकी तन्हाई काटने को दौड़ती रहती । 

तभी प्रमिला की नज़र उसके घर में सब्जी -तरकारी लाने वाले उसके घर के नौकर कन्हैया से मिलती है जिसको प्रमिला अपने शारीरिक जरूरतों को पूरा करने का जरिया बना लेती है। कन्हैया प्रजापति निवास में नौकर के साथ साथ रामदेव का ड्राइवर भी था, वो यहाँ अपने भतीजे राजू के साथ काम करता था। राजू रामदेव के गोडाउन पर मजदूरी करता था। राजू और कन्हैयाँ दोनों काफी मेहनती और मजबूत इंसान थे दोनों का गठीला बदन बहुत ही आकर्षक था। 

वही प्रमिला की बेटी नंदनी जिसने बहार की दुनिया नहीं देखि थी उसके मन भी बहुत ही अशांति थी। घर पर गोडाउन के काम के सिलसिले से आते देख राजू पर उसका भी दिल आ गया था और राजू भी नंदनी को प्यार करने लगा था दोनों माँ बेटी को उनकी जरूरतों का ध्यान रखने वाले मिल गए उनके चहरे पर उनकी वजह से रौनक थी। 

अचानक एक दिन रात को रामदेव की नींद खुलती है उसके बाजु में प्रमिला गहरी नींद में सो रही थी. रामदेव अपने बिस्तर से पानी पिने के लिए कमरे में रखे टेबल पर पानी के जग और गिलास की तरफ बढ़ता है पानी पीते हुए उसकी नजर खुले पड़े टेबल के ड्रावर पर पड़ती है वह कमरे की हलकी रोशनी में ड्रावर के अंदर पड़े एक पैकेट को देखता है। 

उसको ड्रावर से बहार निकaल कर गौर से देखता है तो उसको एक कंडोम का पैकेट दीखता है। रामदेव बहुत हैरान हो जाता है , क्रोध शक और जलन भरी नज़र से सो रही प्रमिला को देखता है।       
           अगले दिन सुबह वो प्रमिला और नंदनी को बताता है की वह एक हफ्ते के लिए जयपुर जा रहा है किसी जमींन के सौदे के लिए , तभी ये जानकर दोनों माँ बेटी को बहुत ही ख़ुशी होती वो इसलिए की उसके जाने पर उनकी बंदिशे तब तक के लिए ख़तम हो जाएगी , और रामदेव वहा से चला जाता है।

 उसी वक्त वहा कन्हैया थैले में कुछ सामान लिए हुए वहा आ जाता है जिसे देख प्रमिला उत्तेजित हो जाती है और उसको अंदर जाने का इशारा करती है , प्रमिला नंदनी से कहती है की आज वो उसे कही बहार घूमने ले जाएगी ये सुनकर वह काफी खुश हो जाती है और तैयार होने की बात करती है पर वहा प्रमिला उसको आराम से तैयार होने को कहती है। क्योंकि कन्हैया उसके लिए तैयार बैठा था नंदनी अपनी माँ की बात समझ जाती है और अपने कमरे में चली जाती है ।

 कन्हैया और प्रमिला अपने कमरे में रोमांस कर रहे होते है तभी वहा अचानक से रामदेव उस कमरे में आ जाता है और उन दोनों को रंगे हाथ पकड़ लेता है , प्रमिला और कन्हैया रामदेव को देख कर डर जाते है । 

प्रमिला ढोंग करते हुए बोलती है की कन्हैया उसके कमरे में जबरजस्ती घूंस आया था और उससे जबरजस्ती करने लगा था,  पर रामदेव उसको गुस्से में थप्पड़ मरता है और उनको कल रात को जो कंडोम का पैकेट देखा था उसके बारे में बताता है ।  और शक को यकींन में बदलने के लिए अपने जयपुर जाने के नाटक के बारे में भी बताता है , और फिर बहुत ही गुस्से में आकर रामदेव प्रमिला का गला पकड़ लेता है । प्रमिला खुद को बचाने की कोशिश करती है , तभी कन्हैया भी छुड़ाने की कोशिश करता है पर रामदेव उसको भी लात मारकर गिरा देता है ।

फिर वो प्रमिला की तरफ बढ़ता है और तभी उसके पीछे से ज़ोरदार डाँड़े की मार लगती है सर पकड़ कर जैसे वो पीछे घूमता है तो देखता है की नंदनी उसके पीछे डंडा लिए खडी है , वो उसको देख कर चौक जाता है और उसको भी पकड़ने की कोशिश करता है तभी नंदनी उसके सर पर बार बार वार करके उसको मार डालती है । 

उसी वक्त वह नंदनी का आशीक राजू आ जाता है। उसकी माँ नंदनी के पास आकर उससे गले लग जाती है और कन्हैया को लाश को ठिकाने लगाने के लिए बोलती है । 
३ घंटे बाद रास्ता साफ देखकर , सारे मिलकर गाड़ी की डिक्की में लाश को रखते है और वहा से निकल जाते है । 

उनके जाने के बाद सुखी लाल घर पर आता है। दरवाजा खुला देख कर सीधा अंदर आ जाता है । हॉल से आवाज देता है पर वह कोई नहीं आता है । वो वहा से वापस जाने के लिए जैसे पलटता है, तभी उसको जमींन पर एक एंड्राइड सेल फ़ोन पड़ा मिलता है ।  वो बोलता है की ये फ़ोन तो सेठ जी की है । वो देखता है की फ़ोन तो बंद हो चूका है और वहा किसी को न देखकर वहा से मोबाइल जेब में डाल कर वहा से चला जाता है। 

रात के समय में चारो लाश को एक सुनसान से जंगल की तरफ ठिकाने लगाने के लिए आये है। वो लाश को जमीन पर रखते है।  फिर एक दूसरे को देखते है , प्रमिला कन्हैया को इशारा करती है सर हिलाकर कन्हैया उसकी बात समझ जाता है और लाश के सर पर बड़े से पत्थर से वार करता है। ताकि उसका चेहरा कोई पहचान न सके। 

 वहा प्रमिला राजू और कन्हैया को कुछ पैसे देकर उनकों गाँव से चले जाने को बोलती है। राजू और कन्हैया वहाँ से दूसरी और चले जाते है । 

फिर प्रमिला गाड़ी में ड्राइविंग के सीट पर बैठती है , उसके बाजु में नंदनी बैठकर अपनी माँ को गाड़ी चलाते हुए हैरानी से देखती है।  उसकी माँ उसको स्माइल देती है और फिर कन्हैया का पर्स निकलती है गाड़ी के ड्रावर से । नंदनी उसकी हरकत देख कर समझ जाती है की माँ सारा इल्जाम उन दोनों पर डालना चाहती है ।और दोनों वहा से निकल जाते है। 

और इसी तरह आपराधिक गतिविधियों का खेल शुरू होता है । इस तरह की गतिविधियों का कैसे अंत होता है बहुत ही रुचिकर है, यह जानने के लिए इस कहानी का दूसरा भाग आपके सामने बहुत जल्द प्रस्तुत होगा । 
To be continued.....

अभी तक आपने देखा कि किस तरह से रामदेव प्रजापति को प्रमिला और उसकी बेटी नंदनी राजू और कन्हैया की मदद से मारकर लाश को ठिकाने लगाने के लिये जंगल मे ले जाते है । प्रमिला राजू और कन्हैया कुछ पैसे देकर उनको गांव से दूर चले जाने के लिये कहती है, वो दोनों वहा से दूसरी दिशा में चले जाते हैऔर प्रमिला कन्हैया का पर्स गाड़ी के ड्रावर से निकाल कर जंगल मे फेक देती है । दोनों मा बेटी कार लेकर अपने घर की तरफ निकलते हैं ।

 इस घटना को 5 दिन बीत चुके हैं । 
प्रजापति निवास के बाहर एक सिल्वर कलर की स्कोडा गाड़ी रुकती है । उसके अंदर से दोनों मा और बेटी निकलती है । वो अचानक देखती है कि घर के दरवाजे पर गोल मटोल गोरी रंग की राजस्थानी वेशभूषा पहने हुए एक महिला खड़ी है ।

 नंदनी अपनी माँ से "राधा - बुआ ! ये यहाँ कैसे!" दोनो मा और बेटी के चेहरे की रंगत राधा बुआ को दूर से देख कर उड़ चुकी है । वो दोनों उनके करीब जाकर नमस्ते करते है पैर छू कर आशीर्वाद लेते हुए -

प्रमिला " दीदी आप यहाँ कैसे कोई आने की खबर नही दी।" राधा बुआ उन दोनों की तरफ थोड़ी खडूस स्वभाव से "पहले ये बताओ तुम दोनों कहा से आ रही हो, इतनी बड़ी हवेली को वीरान बना रखा है ।"

"जी दीदी हम वो हम दोनों (झिझकते हुए) बाजार से जरूरत के कुछ सामान लेने गए थे ।"  राधा बुआ थोड़ी नरमी से "अरे रामा(रामदेव प्रजापति) कहा है? कब से उसको फोन लगा रही हूं लेकिन उसका फोन तो बंद आ रहा है ।"

नंदनी थोड़ा हिचकिचाते हुए "जी बुआ जी बापूसा किसी काम से 1 हफ्ते के लिए जयपुर गए हुए हैं ।" प्रमिला अपनी जिग्यासा की बांध को तोड़ते हुए " जी दीदी लेकिन आप यहाँ..!" राधा बुआ थोड़ा तिलमिलाते हुए " मेरे छोटे भाई के घर मे आने के लिये मन्ने सोचना पड़ेगा के और सुन बींदणी ज्यादा खोज खबर रख कोनी, अरे सब दरवाजे पे ही पुछ कर यही से बिदा करेगी के ।"

नंदनी जल्दी से घर का ताला खोलती है। तीनो (प्रमिला, नंदनी एवं राधा बुआ) हॉल में उपस्थित है । हॉल के सोफे पर बैठ कर चाय की चुस्की लेते हुए बुआ "देख बींदणी ! मैं आयी हु नंदनी के शादी की तैयारी के लिए"। प्रमिला और नंदनी बुआ की बाते सुन कर आश्चर्य से एक दूसरे को देख रही है ।

"शादी…!" जिज्ञासा पूर्वक प्रमिला ने पूछा । "हाँ, रामे से कुछ दिन पहले ही बात हुई थी । उसने नंदनी के छोरा देखने की बात कही थी ,जो मैंने देख राखी है । वा छोरा लाखों में एक है हीरा है हीरा । और सौ की सीधी बात कहु तो रामा भी उस छोरे को जानता हैं ।" ये बात सुनकर दोनो हक्का बक्का हो गयी है । प्रमिला हैरानी से "लेकिन उन्होंने ये बात हमें नही बताई ।"

 बुआ ठंडी सांस लेते हुए "अरे तो क्या हुआ मैं बताये दे रही हूं , वैसे भी वह अपने काम काज में बहुत व्यस्त रहवे है भूल गया होगा । लेकिन अब मैं यहाँ आ गयी देखना कैसे सारी तैयारियां कैसे फटाफट करवाती हैं । रामा देख कर खुश हो जावेगा ।"  इतना कहकर बुआ चाय खत्म करके सोफे से उठ खड़ी होती है "ठीक है तो अब मैं थोड़ा आराम कर लेती हूं , कल से तैयारियां शुरू करूँगी ।" बोलकर बुआ अंदर चली जाती है ।

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         बुआ के जाने के बाद नंदनी तमतमाते हुए अपनी माँ से  "माँ मै कोई शादी वादी नही करने वाली। मुझे अपनी जिंदगी खुल कर जिनी है, किसी की दखल मुझको बिलकुल पसंद नही ।"

प्रमिला एक नजर हल्की मुस्कान के साथ नंदनी को देखते हुए "शादी तो तुमको करनी होगी ।" नंदनी प्रमिला की बातों से हैरान होकर गुस्से में "शादी ! माँ तुम्हारा दिमाग तो ठीक है , ये क्या बोल रही हो ।"

"मैं ठीक बोल रही हूं , अगर तुम्हारे बाप की करोड़ो की दौलत हमें चाहिए तो ये शादी तुम्हें करनी ही होगी ।" प्रमिला ने बड़ी होशियारी से कहा । "तुम तो जानती हो न तुम्हारे बापू सा ने कहा था कि अगर उनके व्यापार को सम्हालने के लिये कोई उनका अपना नही मिला तो ये करोडों की जायजाद दीनदयाल NGO के हाथों में सौंप दी जाएगी ।

और अगर ऐसा हुआ तो हमारे हांथो में सिर्फ ये 50 लाख की कोठी रह जाएगी । और हमको तो Bussiness का B भी नही आता ।" नंदनी को बात कुछ हजम नही हुई तो उसने पूछा "लेकिन मा शादी के बाद तो वैसे भी मैं तुमसे दूर अपने ससुराल चली जाउंगी, फिर ?"

"तुम उसकी फिक्र मत करो तुम हमेशा मेरे पास रहोगी ।"  प्रमिला कहती है ।
"वो कैसे माँ?"!...नंदनी ने जिज्ञासा वश पूछा । प्रमिला ने खलनायिका के अंदाज में नंदनी की तरफ मुस्कुराते हुए देख कर बोला " घर जमाई।" हाँ घर जमाई बन कर रहेंगा तेरा दूल्हा मेरी लाडो ।"

मित्रों यह कहानी आगे भी जारी रहेगी । यकीन मानिए इस कहानी में बहुत से रोमांचक मोड़ है जो आपको इस कड़ी से जोड़े रखेगी ।

To be continued....

Written by Rahul Singh



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